ग्रह शांति पूजा — नवग्रह दोष निवारण के उपाय
वैदिक ज्योतिष में नवग्रह — सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — मानव जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रभावित करते हैं। जब कोई ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति में हो, नीच राशि में हो, या पापी ग्रहों से पीड़ित हो, तो उसेग्रह दोष कहा जाता है। ग्रह शांति पूजा इन दोषों को कम करने और ग्रहों की कृपा प्राप्त करने का एक पारंपरिक वैदिक उपाय है।
नवग्रह शांति पूजा क्या है?
नवग्रह शांति पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है जिसमें सभी नौ ग्रहों की विधिवत पूजा की जाती है। इस पूजा में मंत्र जाप, हवन,दान और विशेष अर्चना शामिल होती है। प्रत्येक ग्रह के लिए निर्धारित दिन, रंग, अनाज और धातु का उपयोग किया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से तब करवाई जाती है जब कुंडली में कोई ग्रह दोष हो, जीवन में बाधाएं आ रही हों, या किसी शुभ कार्य से पहले ग्रहों को अनुकूल करना हो।
1. सूर्य ग्रह — आत्मा और अधिकार
दोष के लक्षण: आत्मविश्वास की कमी, पिता से कष्ट, सरकारी कार्यों में बाधा।मंत्र: "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" — 7000 जाप।दान: रविवार को गेहूं, गुड़, तांबे का दान। शुभ दिन: रविवार।रंग: लाल/केसरिया।
2. चंद्रमा ग्रह — मन और भावनाएं
दोष के लक्षण: माता से कष्ट, अस्थिर मन।मंत्र: "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः" — 11000 जाप।दान: सोमवार को चावल, दूध, सफेद वस्त्र का दान।शुभ दिन: सोमवार। रंग: सफेद।
3. मंगल ग्रह — शक्ति और साहस
दोष के लक्षण: क्रोध, दुर्घटना, भूमि संबंधी विवाद, विवाह में देरी (मंगल दोष)। मंत्र: "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" — 10000 जाप।दान: मंगलवार को मसूर दाल, लाल वस्त्र, तांबा।शुभ दिन: मंगलवार। रंग: लाल।
4. बुध ग्रह — बुद्धि और संवाद
दोष के लक्षण: व्यापार में हानि, शिक्षा में बाधा।मंत्र: "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" — 9000 जाप।दान: बुधवार को मूंग दाल, हरे वस्त्र, कांसे का दान।शुभ दिन: बुधवार। रंग: हरा।
5. बृहस्पति (गुरु) ग्रह — ज्ञान और भाग्य
दोष के लक्षण: भाग्य में बाधा, विवाह में देरी।मंत्र: "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" — 19000 जाप।दान: गुरुवार को चना दाल, पीले वस्त्र, हल्दी, सोना।शुभ दिन: गुरुवार। रंग: पीला।
6. शुक्र ग्रह — प्रेम और सौंदर्य
दोष के लक्षण: वैवाहिक कलह, प्रेम में असफलता, वाहन दुर्घटना। मंत्र: "ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः" — 16000 जाप।दान: शुक्रवार को चावल, सफेद वस्त्र, इत्र, दही।शुभ दिन: शुक्रवार। रंग: सफेद/बहुरंगी।
7. शनि ग्रह — कर्म और अनुशासन
दोष के लक्षण: देरी, बाधाएं, दरिद्रता, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप। मंत्र: "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" — 23000 जाप। दान: शनिवार को तिल, उड़द दाल, काले वस्त्र, लोहा, सरसों तेल।शुभ दिन: शनिवार। रंग: काला/नीला।
8. राहु ग्रह — भ्रम और अचानक परिवर्तन
दोष के लक्षण: भ्रम, अज्ञात भय, सर्प भय, अचानक हानि।मंत्र: "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" — 18000 जाप।दान: शनिवार/बुधवार को कंबल, नारियल, उड़द दाल।विशेष उपाय: राहु काल में पूजा न करें, दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
9. केतु ग्रह — मोक्ष और आध्यात्मिकता
दोष के लक्षण: आध्यात्मिक भ्रम, सामाजिक अलगाव।मंत्र: "ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः" — 17000 जाप।दान: मंगलवार/शनिवार को कंबल, तिल, सप्तधान्य। विशेष उपाय:गणेश जी की पूजा और मत्स्य (मछली) दान।
नवग्रह पूजा की विधि
संपूर्ण नवग्रह पूजा में सबसे पहले गणेश पूजा और कलश स्थापनाकी जाती है। फिर नवग्रह यंत्र पर प्रत्येक ग्रह की प्रतिमा या प्रतीक स्थापित किया जाता है। प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का निर्धारित संख्या में जाप, उसके बाद हवन (समिधा, घी और विशेष सामग्री से) और अंत में दान किया जाता है। यह पूजा किसी योग्य पंडित से करवाना सर्वोत्तम है।
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